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: भारत कोकिला सरोजिनी नायडू की जयंती मनाई गई

सेनानी उत्तराधिकारियों ने सरोजनी नायडू के जीवन वृत्त पर प्रकाश डाला व उनके स्वतंत्रता आन्दोलन में योगदान पर की चर्चा
बहराइच। सेनानी उत्तराधिकारी संगठन की ओर से स्थानीय सेनानी भवन में भारत कोकिला सरोजिनी नायडू की जयंती मनाई गई। कार्यक्रम में सेनानी उत्तराधिकारियों ने स्वतंत्रता सेनानी सरोजनी नायडू के जीवन वृत्त पर प्रकाश डाला और उनके स्वतंत्रता आन्दोलन में योगदान पर चर्चा की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संगठन संरक्षक अनिल त्रिपाठी ने कहा कि वह कुशल राजनीतिज्ञ थी। जिन्होंने अपनी कालजयी रचनाओं के माध्यम से लाखों लोगों के दिलों को छुआ। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कमेटी की प्रथम महिला अध्यक्ष थीं जो वर्ष 1928 तक इस पद पर बनी रहीं। सरोजिनी नायडू 1914 में पूज्य बापू महात्मा गांधी जी के सम्पर्क में आईं और पूरे जीवन गांधी दर्शन से प्रभावित रहीं। संगठन के प्रदेश कार्यवाहक महामंत्री रमेश कुमार मिश्र ने कहा कि वे स्वतंत्रता आन्दोलन में जेल गयीं। 1930 में नमक सत्याग्रह आन्दोलन में भाग लिया और सभी कांग्रेस नेताओं के साथ ब्रिटिश पुलिस अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार किया। वह देश की प्रथम महिला राज्यपाल बनीं। उनकी कविता के रंग, कल्पना और गुणवत्ता के कारण पूज्य बापू महात्मा गांधी जी द्वारा उन्हें भारत कोकिला की उपाधि दी गई। समाजसेवी पवन सिंह ने कहा कि प्लेग महामारी में सेवा कार्य के लिए उन्हें केसर-ए-हिन्द से सम्मानित किया गया। वो दूसरे गोलमेज सम्मेलन में गांधी जी के साथ लंदन गयीं। 02 मार्च 1949 को उन्होंने अपनी अंतिम सांस लखनऊ में लीं। अन्त में सेनानी उत्तराधिकारियों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके स्वप्नों का भारत बनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर अधिवक्ता राम रूप मिश्र, प्रशांत पाण्डेय, विनोद त्रिपाठी, सुधीर कुमार सहित तमाम देश प्रेमी मौजूद रहे।

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