महिलाओं को स्वावलम्बन की राह दिखा रहीं परसाखरगमन की शकुन्तला : स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की प्रेरक कहानी
Kunwar Diwakar Singh
Tue, Aug 5, 2025
बहराइच। जिले के रिसिया विकास खण्ड की एक ग्राम पंचायत है परसाखरगमन जिसमें गठित डॉ. भीमराव अम्बेडकर महिला स्वयं सहायता समूह में श्रीमती शकुन्तला देवी पत्नी तीरथराम, आयु लगभग 34 वर्ष, अनुसूचित जाति की इण्टरमीडिएट उत्तीर्ण महिला ने समूह में जुड़ने के बाद समूह से रू. 50,000 की धनराशि ऋण लेकर दरी बनाने का कार्य प्रारम्भ किया। जहाँ इस महिला ने जिन्दगी की तमाम बाधा को पार करते हुए अपने घर की आर्थिक हालात को बदल डाला और अपनी एक नयी सामाजिक पहचान बनाई। इस महिला का नाम श्रीमती शकुन्तला देवी है और इनकी पहचान समूह की एक सक्रिय महिला के रुप में होती है। श्रीमती शकुन्तला ने उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अन्तर्गत राज्य के कई ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को संगठित कर उनके आर्थिक एवं सामाजिक जीवन में उल्लेखनीय बदलाव लाने में सफलता प्राप्त की है। खेती बारी कम होने के कारण एवं गाँव में कोई रोजी-रोजगार न होने के कारण श्रीमती शकुन्तला देवी को हमेशा आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ता था। बच्चों के लिए भोजन की एवं स्कूल की व्यवस्था करना मुश्किल था। तभी आजीविका मिशन द्वारा 2019 में गाँव में समूह बनाये जाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा था जिसमें श्रीमती शकुन्तला देवी ने सक्रिय भूमिका निभाई उन्होने न स्वयं वल्कि अपने आसपास की गरीब महिलाओं को समूह से जोडा। स्वरोजगार की तरफ इनका रूझन 2024 में प्रारम्भ हुआ तब इन्होने अपने स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर इन्होने दरी बनाने की मशीन व इसमे उपयोग होने वाली समाग्री खरीदकर दरी बनाने का कार्य प्रारम्भ किया गया। जिसकी बिक्री वर्तमान में अपने विकास खण्ड व जनपद स्तर पर स्टॉल लगाकर कर रही है। दरी के कार्य से उनको प्रतिमाह रू. 10 से 12 हज़ार की आमदनी हो जाती है जिससे वो अपने परिवार का पालन पोषण अच्छे ढंग से कर पा रही है। सम्पूर्णता अभियान अन्तर्गत आडिटोरियम परिसर में आयोजित आकांक्षा हाट में श्रीमती शकुन्तला के स्टाल पर समूह द्वारा तैयार की गई दरी लोगों का आकर्षित कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन