: ब्रह्मकुमारीज आश्रम पर मनाया गया मातेश्वरी जगदम्बा का 59वाँ स्मृति दिवस
Admin
Mon, Jun 24, 2024
बहराइच। शहर के तिकोनी बाग पर स्थिति ब्रह्मकुमारीज संस्था में मातेश्वरी जगदम्बा की तस्वीर पर ब्रह्माकुमारी दीदी साधना, दीदी जया, दीदी भावना, संस्था में आए हुए ब्रह्माकुमार और ब्रह्माकुमारियों के द्वारा फूल माला, पुष्प गुच्छ, पुस्पंजलि अर्पित कर श्रृद्धांजलि अर्पित कर भोग लगाया गया और भोग को संस्था में आए हुऐ ब्रह्मकुमार एवं ब्रह्माकुमारियों को वितरित किया। सोमवार को मातेश्वरी जगदम्बा के 59वें स्मृति दिवस के दिन मातेश्वरी जगदम्बा माँ के मधुर महावाक्य को बताते हुए ब्रह्माकुमारी दीदी जया के द्वारा बताया गया कि इस दुनिया को नाटक भी कहते हैं, ड्रामा कहो, नाटक कहो, खेल कहो बात एक ही है। नाटक जो होता है वह एक ही कहानी होती है। उसमें बहुत बायप्लॉट्स बीच में दिखाते हैं लेकिन स्टोरी एक ही होती है। इसी तरह से यह बेहद वर्ल्ड ड्रामा है, इसको नाटक भी कहा जाता है, जिसमें हम सब एक्टर्स हैं। अभी हम एक्टर्स हैं तो एक्टर्स को नाटक का पूरा पता होना चाहिए कि किस स्टोरी पर यह शुरू होता है, हमारा यह पार्ट कहाँ से शुरू हुआ और कहाँ तक पूरा होता है, फिर उसमें समय प्रति समय किस किस एक्टर्स का कैसे कैसे पार्ट होता है और उसका डायरेक्टर, क्रियेटर कौन है और इस नाटक में हीरो हीरोइन पार्ट किसका है। इन सब बातों का नॉलेज होना चाहिए। खाली नाटक कहने से तो काम नहीं चलेगा। नाटक है तो नाटक के हम एक्टर्स भी हैं। अगर कोई ड्रामा का एक्टर है और हम उनसे पूछें कि इसकी क्या स्टोरी है, यह कहाँ से शुरू होता है, कहाँ पूरा होता है। अगर वो कहे हमें मालूम नहीं है तो इसको क्या कहा जायेगा? कहेंगे इसको इतना भी पता नहीं है, कहता हैं मैं एक्टर हूँ। एक्टर को तो सब बातों की जानकारी होनी चाहिए ना। नाटक शुरू है तो उसका अन्त भी जरुर होगा। इस अवसर पर काफी संख्या में ब्रह्मकुमार, ब्रह्मकुमारियां और अनुयाई सम्मिलित हुए।
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