: घर मे खेल रही बालिका पर झपट्टा मारकर उठा ले गया तेंदुआ, गन्ने के खेत मे मिला क्षत विक्षत शव
Wed, May 1, 2024
धर्मापुर रेंज अन्तर्गत धर्मापुर गांव में रात 9 वजे की घटना
रेन्जर ने आर्थिक सहायता हेतु दिए दस हजार रुपए, बढ़ाई पेट्रोलिंग
बिछिया, बहराइच। कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग के धर्मापुर रेंज अंतर्गत धर्मापुर गांव में बीती रात गांव निवासी चुन्नु की आठ वर्षीय बालिका शमा अपने बहनों के साथ घर मे खेल रही थी। खेलते खेलते दोनो बहने अपने कमरे में चली गयी। जबकि शमा पींछे रह गयी और उस पर पहले से ही घात लगाए बैठे तेंदुए ने झपट्टा मारकर उठा ले गया। रात शमा को कमरे में न पाकर परिजनों को चिंता हुई तो उन्होंने खोजबीन शुरू की और सूचना वन विभाग को दी। कमरे के बाहर खून के निशान पड़ा होने से वन विभाग ने पगचिन्हों के मध्ययम से उसका पीछा किया। रात भर पेट्रोलिंग करते रहे लेकिन कोई सुराग नही मिला। सुबह घर से कुछ दूरी पर गन्ने के खेत मे उसका शव क्षत विक्षत अवस्था मे पाया गया। रेन्जर मोबीन आरिफ ने शव को बरामद किया। घटना की सूचना मिलते ही थाना मुर्तिहा की पुलिस भी मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। रेन्जर ने बताया कि मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता के रूप में 10000 रुपए दिया गया है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजस्व विभाग की तरफ से परिजनों को पांच लाख का मुआवजा दिया जाएगा। साथ पेट्रोलिंग बढ़ा दी गयी है।
: नहर में नहाते समय तीन बच्चे डूबे, एक बालिका लापता
Wed, May 1, 2024
नानपारा के गिरधरपुर गांव की घटना
नानपारा, बहराइच। भीषण गर्मी से निजात पाने के लिए किशोर व किशोरियों का नहर का स्नान उनकी जिंदगी के लिए काल बन गया। गहरे पानी में चले जाने के चलते सभी डूब गए। जिसमें से तीन के शव ग्रामीणों ने बरामद कर लिये हैं। जबकि अभी भी एक बालिका लापता बताई जा रही है। घटना नानपारा कोतवाली के गिरधरपुर गांव की है। जहां स्थित नहर में बुधवार को गांव की किशोरियां और किशोर स्नान कर रहे थे। स्नान करते समय सभी डूब गए। इनमें बालिकाओं समेत तीन लोगों की पानी में डूब कर मौत हो गई। जबकि एक किशोरी लापता है। उसकी तलाश की जा रही है। हादसे की जानकारी होते ही एसडीएम और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। कोतवाली नानपारा अंतर्गत गिरधरपुर गांव के ठीक सामने नहर स्थित है। गर्मी अधिक होने पर नहर में गांव निवासी आंचल 12 पुत्री शोभाराम, चोइनी 10 पुत्र श्रवण, राहुल 13 पुत्र सागर और माही 14 पुत्र सदबरन स्नान करने के गए। दोपहर 12 बजे सभी स्नान कर रहे थे। इसी दौरान स्नान करते समय पैर फिसलने से सभी बच्चे पानी में डूब गए। कुछ देर बाद परिवार के लोगों ने खोजबीन शुरू की तो नहर के निकट कपड़े और चप्पल मिले। जिस पर सभी ने नहर में खोजबीन शुरू की। ग्रामीणों की मदद से नहर से आंचल, चोईनी और राहुल का शव बरामद कर लिया गया। जबकि माही का कुछ पता नहीं चल सका है। उसकी खोजबीन की जा रही है। हादसे की जानकारी होने पर एसडीएम अश्विनी पांडेय, सीओ राहुल पांडेय और कोतवाल आरके सिंह, तहसीलदार गांव पहुंचे। सभी ने जांच कर बयान दर्ज किया। कोतवाल ने बताया कि तीन बालकों की डूबकर मौत हुई है। किशोरी की तलाश की जा रही है।
: धधकती आग से जंगली पेड़ों व वन्य जीवों पर गहराया संकट
Tue, Apr 30, 2024
दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीवों के अस्तित्व पर भी खतरा मडराने लगा
जंगली क्षेत्र में बढ़ रही आगजनी की घटनाओं से पर्यावरण विद चिन्तित
जंगलों की सुरक्षा आग से कैसे हो यह यक्ष प्रश्न बना
विभागीय कर्मी संसाधन के अभाव में आग पर त्वरित काबू पाने में अपने को असहाय पा रहे
शेर सिंह कसौधन
रुपईडीहा, बहराइच। तराई इलाकों में धधकती अग्नि ज्वाला की चपेट में आकर असंख्य जंगली वृक्ष के साथ ही नवजात वृक्षों का विनास भी तेजी से हो रहा है। साथ ही यहाँ के जंगलों में पायें जाने वाले दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीवों के जीवन पर भी खतरा मंडराने लगा है। विभागीय कर्मियों के तमाम मुस्तैदी के बावजूद आये दिन जंगली क्षेत्र में बढ़ रही आगजनी की घटनाओं से पर्यावरण विद चिन्तित नजर आ रहे हैं वहीं विभाग के उच्चाधिकारी पर्याप्त संसाधन अनुपलब्धता से हताश हैं। ऐसे में तराई के जंगलों की अग्नि से सुरक्षा पर सवालिया निशान लगने शुरू हो गये हैं। जंगलों की सुरक्षा आग से कैसे हो यह यक्ष प्रश्न बन गया है। जनपद के भारत नेपाल सीमावर्ती इलाकों में शताब्दियों से बेशकीमती जंगली क्षेत्र बहुतायत में पाया जाता रहा है। बहराइच वन प्रभाग अन्तर्गत अब्दुल्लागंज, चकिया, रुपईडीहा वन्य क्षेत्र का दायरा लगभग पचीस सौ हेक्टेयर में फैला हुआ है। जिसमे दुर्लभ प्राय के साखू, साल, सागौन, समेत जामुन, अर्जुन, सिरसा, कंज, पाकड़, दुडैल आदि प्रजाति के रोहनी बहुतायत में पाये जाते हैं। इन इलाकों में हिरन, सांभर, बारासिंघा, जंगली सुअर समेत तमाम दुर्लभ प्राय के वन्यजीव भी पाए जाते हैं लेकिन गर्मी के शुरुआती दौर से ही यहाँ लगातार आगजनी की बढ़ रही घटनाओं से पर्यावरण विद जहां चिन्तित नजर आ रहे हैं वहीं विभागीय कर्मी संसाधन के अभाव में आग पर त्वरित काबू पाने में अपने को असहाय पा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्रीय ग्रामीण अज्ञानता में नए चारा, खर व जंगली फल कटरवा, गरजुवा की ज्यादा फसल उगने के मंसूबे में वन्य क्षेत्र में आग लगा देते हैं साथ ही आसपास के इलाकों में पराली में भी आग लगाते हैं जिसका फैलाव जंगली क्षेत्र में हो जाता है। इससे काफी हद तक जंगली क्षेत्र में आगजनी की घटनाओं को बढ़ावा मिल रहा है। बढ़ रही आगजनी की घटनाओं से चिंतित पर्यावरण विद राकेश चन्द्र श्रीवास्तव व धीरेन्द्र शर्मा का कहना है कि वन्य क्षेत्र में फैलाव के लिये प्रतिवर्ष स्थानीय जनसहयोग से तमाम पेंड लगायें जा रहे हैं। वन विभाग की ओर से भी लगभग करोड़ों रुपए खर्च किये जाते हैं बावजूद इसके बढ़ रही आगजनी की घटनाओं के चलते वन्य क्षेत्र का संकुचन हो रहा है साथ ही दुर्लभ प्रजाति के पाये जाने वाले वन प्राणियों के अस्तित्व पर भी संकट गहरा रहा है। क्षेत्रीय लोगों का कहना हैं कि आगजनी की बढ़ रही घटनाओं पर प्रभावी अंकुश के लिये वन्यक्षेत्र से जुड़े ग्रामीण इलाकों में लगातार जन जागरण अभियान चलाया जाना चाहिए तभी वन्य क्षेत्र के इलाकों में आगजनी पर प्रभावी अंकुश पाया जा सकेगा। प्रभागीय वनाधिकारी बहराइच संजीव कुमार का कहना है कि वन्य क्षेत्र के खाली पड़े स्थानों पर स्थायी जलभरवाय के लिए तालाब खुदवाये जाने के लिये उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया है। साथ ही जंगली इलाकों में नालियां व चौक डैम्प बनावाकर वन्य इलाके के कंपार्टमेन्ट में वाटर सिस्टम रेजिंग की दूरगामी व्यवस्था हेतु भी पत्राचार किया गया है ताकि आगजनी की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। ग्रामीण इलाकों में अग्नि की घटनाओं पर काबू पाने के लिए जन जागरण अभियान भी चलाया जा रहा है ताकि वन्य क्षेत्र व वन्य जीव की सुरक्षा हो सके।