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: हर्षोल्लास के साथ मनाई गई नाग पंचमी, हुआ नाग देवता का पूजन

सर्पदेवता को दूध व चना चढ़ाकर मनाया गया पर्व
बहराइच। जनपद में नाग पंचमी का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। क्षेत्रीय भाषा में गुडिया कहे जाने वाले इस त्यौहार का हिन्दुओं में विशेष महत्व है। परम्परा के अनुसार इस दिन लड़कियां अपने ससुराल से मायके आती है। आज के दिन नाग देवता की पूजा की जाती है। वहीं बच्चों में इस त्यौहार को लेकर काफी उल्लास रहता है। आज के दिन शाम के समय घर की लड़कियां एक निश्चित स्थान पर कपड़े की गुडिया बनाकर डालती है। जिसे लड़के पीटते है। नाग पंचमी का त्यौहार यू ंतो हर वर्ष देश के विभिन्न भागों में मनाया जाता है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इसे मनाने का ढग कुछ अनूठा है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को इस त्यौहार पर गांवों में गुड़िया पीटने की अनोखी परम्परा है। नाग पंचमी पर महिलाएं घर के पुराने कपड़ों से गुड़िया बनाकर चौराहे पर डालती है और बच्चे उन्हें कोड़ों और डण्डों से पीटकर खुश होते है। इस दिन लोग अपने घरों की दीवारों पर नागों और सांपों की आकृति बनाकर उनकी पूजा करते है। नाग का दर्शन करना इस दिन शुभ मना जाता है। सपेरे नाग लेकर घर-घर जाते है और लोगों को उनके दर्शन करवाकर अच्छी खासी आमदनी करते है। हालांकि कुछ महिला संगठन द्वारा गुड़िया पीटने का विरोध किया जा रहा है। लेकिन गांवों में अभी भी यह प्रथा चालू है। शास़्त्रों के अनुसार इस परम्परा की शुरूआत के बारे में एक कथा प्रचलित है। तक्षक नाग के काटने से राजा परीक्षित की मौत हो गई थी। समय बीतने पर तक्षक की चौथी पीढ़ी की कन्या राजा परीक्षित की चौथी पीढ़ी में व्याही गई। उस कन्या ने ससुराल में एक महिला को यह रहस्य बताकर उससे इस बारे में किसी को भी नहीं बताने के लिए कहा गया। लेकिन उस महिला ने दूसरी महिला को यह बात बता दी और उसने भी उससे यह राज किसी से नहीं बताने के लिए कहा। लेकिन धीरे-धीरे यह बात पूरे नगर में फैल गई। तक्षक के तत्कालीन राजा ने इस रहस्य को उजागर करने पर नगर की सभी लड़कियों को चौराहे पर इक्ट्ठा करके कोड़ों से पिटवा कर मरवा दिया। तभी से नागपंचमी पर गुड़िया पीटने की परम्परा है।

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